Monday, December 21, 2009
Tuesday, November 24, 2009
Monday, November 9, 2009
Thursday, October 1, 2009
ओ प्रेयसी !
ओ प्रेयसी ! .......तुम कितनी सुंदर हो !
किस प्रियतम के दिल की धड़कन हो।?
तेरे नैन कजरारे और चाल हैं मतवारे॥
अधरों में घुले हैं मधुशाला के रस सारे।
तेरी साँसों की लय में सरगम घुली है।
तेरी बोली नहीं ये तो मिश्री कि डली है।
सच! कितना खुश-नसीब है वो प्रियतम !?
जिसकी ये प्रेयसी है।
ओ प्रेयसी ! .......
Wednesday, September 30, 2009
मेरी निगाह......

बहुत करीब से हमें वो देखती है निगाह ,के मेरी जिन्दगी का दायरा कितना है बड़ा ,
जिंदगी का दायरा मालूम है हमें ........ देखो जरा गौर से ये ओउर करती है क्या बाया...?
कि ताकती शुन्य में जैसे खो गया हो कोई अपना जिसने कभी इन आँखों में संजोया था सुनहरा सपना।
मुक्कमल आपका कभी हो दीदार हमें खोये हुए सपने ढूँढ लाने की कोशिश करेंगे ।
शुक्रिया ! दोस्त आपका कि दोस्ती का हक अता किया।
दुआ करो कि हकीक़त में तब्दील हों सपने , रहम दिल हैं खुदा ! दीदार भी होगा .....
अब ये निगाह मेरे सपनों में ना आये आप रोकना ये सब आपके हाथ में है ....
सपने तो बस सपने होते हैं दोस्त ॥हकीक़त ना समझना ।
खूबसूरत होते हैं रेत के घरोंदे भी पर वो होता नहीं अपना।
Saturday, September 26, 2009
मै एक साहित्य प्रेमिका हूँ , लेखिका नहीं हूँ। परन्तु कभी कभी मेरे ह्रदय में भी भावनाओं का लहर उठता है... ओउर मुझे उस लहर को शब्दों में तब्दील करने आता है। वो शब्द सुंदर रचना में तब्दील हो जाती है। बस नही आता तो उन रचनाओं का सदुपयोग करना ।
Sunday, September 6, 2009
जिंदगी


लाचार ज़िन्दगी !!!!!!!!
