
बहुत करीब से हमें वो देखती है निगाह ,के मेरी जिन्दगी का दायरा कितना है बड़ा ,
जिंदगी का दायरा मालूम है हमें ........ देखो जरा गौर से ये ओउर करती है क्या बाया...?
कि ताकती शुन्य में जैसे खो गया हो कोई अपना जिसने कभी इन आँखों में संजोया था सुनहरा सपना।
मुक्कमल आपका कभी हो दीदार हमें खोये हुए सपने ढूँढ लाने की कोशिश करेंगे ।
शुक्रिया ! दोस्त आपका कि दोस्ती का हक अता किया।
दुआ करो कि हकीक़त में तब्दील हों सपने , रहम दिल हैं खुदा ! दीदार भी होगा .....
अब ये निगाह मेरे सपनों में ना आये आप रोकना ये सब आपके हाथ में है ....
सपने तो बस सपने होते हैं दोस्त ॥हकीक़त ना समझना ।
खूबसूरत होते हैं रेत के घरोंदे भी पर वो होता नहीं अपना।