Saturday, April 3, 2010

तुम ख़ास नहीं

कैसे कह दूँ तुम ख़ास नहीं ? तुम सच हो सिर्फ एह्शाश नहीं, हकीक़त हो कोई ख्वाब नहीं, दीखते तो तुम हो दूर मगर , पर दुरी में भी पास हो तुम कैसे समझाऊं दिल को मै कैसे कह दूँ तुम खास नहीं....??!

8 comments:

  1. क्या बात है!
    बहुत खूब...सुंदर अभिव्यक्ति

    आलोक साहिल

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  2. बहुत खूब...सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. क्या कहे यह महामूर्खराज आपसे आपकी रचना है बहुत खास
    जैसे विरह की पीङा जैसे प्रभु का मिलन

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  4. अच्छा लिखती हैं.....यूँ ही लिखती रहें !!
    http://shayarashok.blogspot.com

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  5. anshoo....!!mere vichaar se tumhe thodha aur sochnaa chaahiye....ekdam se vichaar aate hi likh dene se cheezen vaisi nahin utar paati.. jaisi padhne men kuchh khaas lagen....beshak kam padhne vale kuchh tareef kar len tumhaari.... thoda bhi jyada samajhne vale-jaanane vale in kavitaaon ko us tarah nahin saraah sakte....haan yah kah saktaa hun ki tumhara prayaas acchha hai....magar aur soch kar likho to tuhen khud bhi jyada acchha lagegaa...lagegaa naa anshoo......??

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  6. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
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